न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर में इस्तेमाल होने वाले विटामिन्स के लिए आरडीए वैल्यू चिंताजनक

न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर में इस्तेमाल होने वाले विटामिन्स के लिए आरडीए वैल्यू चिंताजनक

अहमदाबाद. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के आंकड़ों के आधार पर न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर में विटामिन- B12 के लिए खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा अनुशंसित आहार भत्ता (RDA) मूल्यों में स्पष्टता की कमी पर विशेषज्ञों ने चिंता व्यक्त की है। उनके अनुसार यह सारेकाम स्टेकहोल्डर (हिस्सेदार) के भागीदारी के बिना किया जाता है और इसके साथ ही इसमें वैज्ञानिक साक्ष्य और औचित्य का अभाव है। विशेषज्ञों ने बताया कि एफएसएसएआई के वैज्ञानिक सूची (panel) और वैज्ञानिक आयोग (committee) ने इस मामले में आईसीएमआर और कोडेक्स के संदर्भ में विभिन्न माइक्रो न्यूट्रीएन्ट्स के लिए विटामिन और खनिजों में आरडीए वैल्यू की सलाह दी है। कोडेक्स अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाए गए खाद्य मानकों और उससे संबंधित विषयों का एक समान रूप में प्रस्तुतिकरण है। इन खाद्य मानकों और संबंधित विषयों का उद्देश्य उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा करना और खाद्य व्यापार में सही नियमों को सुनिश्चित करना है। जबकि औषधीय उद्योग या फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री, विशेष रूप से विटामिन बी12 के लिए परिभाषित आरडीए वैल्यू से संतुष्ट नहीं हैं। इस साल जनवरी में जारी किए गए दस्तावेज का उद्देश्य हेल्थ सप्लीमेंट्स और न्यूट्रास्यूटिकल्स की समझ और अनुपालन में मदद करना है। लेकिन फार्मा सलाहकार डॉ. संजय अग्रवाल ने यह सवाल किया है कि एफएसएसएआई ने क्या लक्ष्य हासिल कर लिया है? विवाद यह है कि वैज्ञानिक सूची और वैज्ञानिक आयोग ने विटामिन बी12 के लिए प्रतिदिन 1 माइक्रो ग्राम के आरडीए वैल्यू की सलाह दी है। तकनीकी दल को यह समझना चाहिए कि विटामिन बी12 एकल घटक नहीं है। विटामिन बी12, चार प्रकार के होते हैं और मानव शरीर सभी चार बी12 विटामिनों के लिए अलग-अलग प्रतिक्रिया करता है। मिथाइलकोबालामिन का उपयोग न्यूरो-सुरक्षा और इसके देखभाल के लिए किया जाता है। आरडीए को संशोधित किया जाना चाहिए और यह पुराने आंकड़ों या अध्ययनों के आधार पर निर्धारित नहीं होना चाहिए। भारतीय परिवेश अलग है, जहां हम अधिक शाकाहारी हैं और मिथाइलकोबालमिन का अधिक स्रोत मांसाहारी भोजन है, इसीलिए एफएसएसएआई को मिथाइलकोबालिन के कान्सन्ट्रेशन पर फिर से विचार और मूल्यांकन करना चाहिए। उदाहरण के लिए, जब विटामिन बी 12 का एक प्रकार – मेथिलकोबालामिन का सेवन किया जाता है, तो यह सीधे अवशोषित हो जाता है, जब एक दूसरे प्रकार के विटामिन बी 12 – सिनोकोबलामिन का सेवन किया जाता है, तो इसका केवल दसवां हिस्सा मिथाइलकोबालमिन में परिवर्तित होता है और शरीर द्वारा अवशोषित होता है। डॉ. अग्रवाल बताते हैं कि इसलिए अगर 1 माइक्रोग्राम मेथिलकोबालामिन लिया जाता है, तो शरीर सिनोकोबलामिन के 1 माइक्रोग्राम की तुलना में अलग तरह से प्रतिक्रिया करेगा।

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